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Gulzar Shayari in Hindi | 2 Liner Hindi Shayari


जब गिला शिकवा अपनों से ही हो तो ख़ामोशी ही भली,
अब हर बात पे जंग हो ये जरुरी तो नहीं |
फूल देखे थे जनजो पे अक्सर मैंने,
मगर कल शहर में फूलो का ही जनाजा देखा |
उम्र जाया कर दी लोगो ने औरो के वजूद में नुक्सा निकालते-निकालते,
इतना अगर खुद को तराशा होता तो फ़रिश्ते बन जाते | 

आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है ,
जो भी छुपा है मन में लुटा देने का मन है |

तुझको बेहतर बनाने की कोशिश में तुझको ही वक्त नहीं दे पा रहे हम,
माफ़ करना ऐ-ज़िन्दगी तुझको ही जी नहीं पा रहे हम |

लगता है ज़िंदगी कुछ खफा है ,
लगता है ज़िंदगी कुछ खफा है ,
चलिए छोड़िये साहिब कौन सी पहली दफा है|

बिखेरे बैठा हु कमरे में सब कुछ ,
बिखेरे बैठा हु कमरे में सब कुछ ,
कही एक खाव्ब रखा था अब वो भी गुम है |

न जाने क्या पता कब कहा मारेगी,
इसीलिए ज़िन्दगी से डरता हु,
मौत का क्या है वो तो बस एक बार मारेगी |

दवा अगर काम न आये तो नजर उतारती है,
ये माँ है साहब हार कहाँ मानती है |
पुराणी होकर भी खास होती जा रही है ,
मोह्हबत बेशरम है जनाब बेहिसाब होती जा रही है |

ऊपर दी गयी सभी शायरी गुलज़ार साहब की लिखी हुई है |उम्मीद करता हु दोस्तों आपको ये गुलज़ार साहब की शायरी पसंद आयी हो |इसी तरह की और भी शायरी पढ़ने के लिए हमे फॉलो कीजिए Hindi Shayari Adda

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