Jaun Elia Shayari

Jaun Elia Shayari

उर्दू के सबसे महान कवियों में से एक, जौन एलिया, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए थे लेकिन विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। उनकी कविताएँ उनके क्रांतिकारी विचारों को दर्शाती हैं और उनका प्यार हमेशा अप्राप्त है। निहिलिज्म, अकेलापन, अलगाव और आत्म-विनाश का एक गहरा दुःख उनकी कविता के केंद्रीय विषय हैं

Jaun Elia Shayari

जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
दिल तमनन्ना से डर गया जनाब,
सारा नशा उतर गया जनाब
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
अजब इक शोर सा बरपा है कहीं
कोई खामोश हो गया है कहीं
इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र
 काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर,
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है
Jaun Elia Shayari Jaun Elia Shayari Reviewed by Admin on 12:14 AM Rating: 5

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